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मध्यप्रदेश के विकास को निर्णायक गति 2023

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मध्य प्रदेश सरकार के लगातार प्रयासों से 20 वर्षों में बदल गया निवेश का नज़रिया, प्रदेश में विकास को निवेश से मिली निर्णायक गतिसमिट 2023 में प्राप्त हुए 15 लाख 42 हजार 500 करोड़ से अधिक के Start प्रस्ताव

निवेश के माध्यम से मध्यप्रदेश के विकास को निर्णायक गति प्रदानकी जा रही है। मध्यप्रदेश सरकार ऐसे सभी प्रयास कर रही है, जिससे कि निवेश करने वाले उद्योगपतियों की एक पाई भी व्यर्थ नहीं जाए। संवाद, सहयोग, सुविधा, स्वीकृति, सेतु सरलता और समन्वय के 07 सूत्रों से उद्योगों को पूर्ण सहयोग की रणनीति अपनाई जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट

मिले हैं, जिनसे 29 लाख लोगों को रोजगार देने की संभावनाओं को साकार किया जा सकेगा। इंटेशन टू इन्वेस्ट के फलस्वरूप क्रियान्वयन से प्रदेश की प्रगति में महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में 06 लाख 09 हजार 478 करोड़, नगरीय अधोसंरचना में 02 लाख 80 हजार 753 करोड़, खाद्य प्रसंस्करण और एग्री क्षेत्र में 01 लाख 06 हजार 149 करोड़, माइनिंग और उससे जुड़े उद्योगों में 98 हजार 305 करोड़, सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 78 हजार 778 करोड़ केमिकल एवं पेट्रोलियम इंडस्ट्री में 76 हजार 769 करोड़, विभिन्न सेवाओं के क्षेत्र में 71 हजार 351 करोड़, ऑटोमोबाईल और इलेक्ट्रिक व्हीकल के क्षेत्र में 42 हजार 254 करोड़, फार्मास्युटिकल और हेल्थ सेक्टर में 17 हजार 991 करोड़, लॉजिस्टिक एवं वेयर हाऊसिंग क्षेत्र में 17 हजार 916 करोड़, टेक्सटाइल एवं गारमेंट क्षेत्र में 16 हजार 914 करोड़ तथा अन्य क्षेत्रों में 01 लाख 25 हजार 853 करोड़ का निवेश किए जाने के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन सभी से 29 लाख लोगों को रोजगार मिलने की आशा है।

2023 के माध्यम से उद्योगपतियों और निवेशकों द्वारा 15 लाख 42 हजार 500 करोड़ रुपए से अधिक के लागत के उद्योग लगाने के प्रस्ताव मध्यप्रदेश को

10 हजार क्षमता का नया कन्वेंशन सेंटर बनाने की तैयारीमध्यप्रदेश में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट की सफलता के लिए प्रदेश के सभी मंत्रीगण, केन्द्रीय मंत्रीगण, विभिन्न देशों के राजदूत. बिजनेस लीडर्स और अधिकारी-कर्मचारी धन्यवाद के पात्र हैं। समिट के प्रति प्रदेश के लोगों में भी काफी उत्साह था। इस तरह के कार्यक्रमों की भावी आवश्यकता को देखते हुए इंदौर में 10 हजार लोगों की क्षमता का नया कन्वेंशन सेंटर बनाया जायेगा

BMW’s Electric Revolution: A Paradigm Shift in the Automotive Industry

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100 % electric. 100 % driving pleasure. 100 % BMW

THE BMW Ix The first all-electric BMW iX is a first of its kind in a future-oriented generation of automobiles. With fully-electric driving pleasure and newly-developed, precise and minimalist monolithic design, the BMW iX is a vision turned into Reality The automobile industry has been undergoing a significant transformation in recent years, with an increasing focus on sustainability and eco-friendliness. As concerns about climate change and environmental impact grow, automotive manufacturers are exploring alternative solutions, one of which is the development of electric vehicles (EVs). Among these automakers,

BMW has emerged as a key player in the electric car market. In this blog, we will delve into BMW’s foray into the world of electric vehicles, exploring their vision, innovations, challenges, and the impact they have made on the automotive landscape.1. A Vision for a Sustainable Future:BMW’s venture into electric cars stems from its commitment to sustainability and reducing carbon emissions. The company envisions a future where electric mobility plays a pivotal role in reducing the ecological footprint of transportation. As a result, BMW has invested heavily in research and development to design cutting-edge electric vehicles that provide a seamless blend of luxury, performance, and eco-friendliness.2. The Genesis of BMW’s Electric Endeavor:BMW’s journey into the realm of electric vehicles began with the introduction of its first electric car,

the BMW i3, in 2013. The i3 set a new benchmark for sustainable urban transportation with its all-electric powertrain and innovative use of sustainable materials. It marked the beginning of BMW’s electric revolution and laid the foundation for further developments in the electric car segment.3. BMW i Series: Pioneering Electric Luxury:Following the success of the i3, BMW expanded its electric lineup with the BMW i8, a plug-in hybrid sports car that combined electric power with a gasoline engine for enhanced performance. The i8 showcased BMW’s dedication to pushing the boundaries of electric vehicle technology while maintaining the brand’s iconic luxury and sportiness.6. The Impact on the Automotive Landscape:BMW’s entry into the electric vehicle market had a profound impact on the automotive industry. It encouraged other manufacturers to intensify their efforts in developing electric cars, accelerating the global shift towards sustainable transportation. Moreover, BMW’s electric cars gained widespread acceptance among consumers, showcasing that electric vehicles can offer performance, luxury, and environmental responsibility without compromising on driving experience.

4. Future Prospects:Looking ahead, BMW continues to expand its electric vehicle lineup, with plans to introduce more electric models across different segments. The company’s commitment to sustainable development and constant innovation ensures that BMW remains at the forefront of the electric mobility revolution.Conclusion:BMW’s electric car journey exemplifies the transformative power of sustainable development in the automotive industry. From the inception of the i3 to the revolutionary iX series, BMW’s electric vehicles have set new standards for luxury, performance, and eco-friendliness. As the world embraces a greener future, BMW’s commitment to electric mobility reaffirms its position as a leader in the global automotive landscape. Through innovation, vision, and determination, BMW is driving a paradigm shift that promises a more sustainable and electrifying future for the world of transportation.

कंप्यूटर में घुसकर लोगों के निजी डाटा चुरा रहा ‘अकीरा’

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कंप्यूटर में घुसकर लोगों के निजी डाटा चुरा रहा ‘अकीरा’नई दिल्ली। इंटरनेट पर अकीरा नाम से एक नया रेनसमवेयर वायरस फैल रहा है। यह लोगों के कंप्यूटर व लैपटॉप में पहुंच कर उनका निजी डाटा अपने कब्जे में ले रहा है। डाटा लौटाने के बदले वायरस को फैलाने वाले साइबर अपराधी फिरौती मांग रहे हैं। भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सर्ट-इन) ने सभी इंटरनेट यूजर्स को इसे लेकर चेताया है। अपनी एडवाइजरी में केंद्र सरकार की एजेंसी सर्ट-इन ने बताया कि विंडोज और लीनक्स आधारित कंप्यूटरों पर इस वायरस का खतरा है।एजेंसी के अनुसार जो यूजर अकीरा की चपेट में आ रहे हैं, उनके डाटा को यह वायरस उन्हीं के कंप्यूटर में एनक्रिप्ट (कूट फाइल में बदलना) कर दे रहा है। इससे यूजर अपने ही डाटा को न देख पा रहे हैं, न उपयोग कर पा रहे हैं। इसे डी-क्रिप्ट करने के बदले फिरौती के रूप में पैसा मांगा जा रहा है। जो पैसा नहीं देता, उसका डाटा डार्क वेब पर सार्वजनिक किया जा रहा है। सर्ट-इन के अनुसार यह साइबर अपराधियों की गैंग अपने शिकार की पहचान वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (वीपीएन) के जरिए कर रही है। इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सावधान रहें. सुरक्षा के लिए बने प्रोटोकॉल का पालन करें।

■ रेनसमवेयर वायरस कंप्यूटर डाटा को कब्जे में लेते हैं, ऐसे में जरूरी डाटा का ऑफलाइन बैकअप भी रखें। # इस बैक-अप को अपडेट भी करते रहें ताकि ताजा व महत्वपूर्ण डाटा इन हमलों से खो न जाएरैनसमवेयर एक प्रकार के कंप्यूटर प्रोग्राम हैं, जो अपने शिकार के डाटा या पूरी कंप्यूटर प्रणाली को हो ब्लॉक करके यूजर को इसे उपयोग करने से रोक सकते हैं। अकोरा के बारे में बताया गया है कि यह अपने शिकार कंप्यूटर। की फाइलों कब्जे में लेने के बाद उसे नया एक्सटेंशन ‘डॉट अकोरा’ दे डालता है। इससे यूजर्स इन्हें उपयोग नहीं कर पाते। यह वायरस फाइलों को कब्जे में लेने के लिए हो रहे एनक्रिप्शन के दौरान विंडो की एक्टिव सेवाएं बंद कर देता है। इससे एनक्रिप्शन प्रक्रिया में कोई व्यवधान या हस्तक्षेप नहीं कर पाता। सर्ट इन के अनुसार अकोरा हार्ड ड्राइव के फोल्डरों में मौजूद फाइलों को अपने कब्जे में ले रहा है। वहीं प्रोग्राम डाटा, रिसाइकिल बिन, बूट, विंडो फोल्डर आदि में मौजूद फाइलें यह एनक्रिप्ट नहीं कर रहा।बचाव के लिए ये सुझाव दिए# इंटरनेट इस्तेमाल करते समय सावधान रहें. सुरक्षा के लिए बने प्रोटोकॉल का पालन करें।

■ रेनसमवेयर वायरस कंप्यूटर डाटा को कब्जे में लेते हैं, ऐसे में जरूरी डाटा का ऑफलाइन बैकअप भी रखें। # इस बैक-अप को अपडेट भी करते रहें ताकि ताजा व महत्वपूर्ण डाटा इन हमलों से खो न जाए।ऑपरेटिंग सिस्टम व ऐप को अपडेट रखें, इससे साइबर अपराधी पुरानी कमियों का सहारा लेकर कंप्यूटर में घुसपैठ नहीं कर पाएंगे।• अनाधिकृत माध्यमों से अपने सिस्टम या एप अपडेट न करें और मजबूत पासवर्डके बहुपक्षीय प्रमाणीकरण नीतियों का पालन करें ।

Understand the Chandrayaan 3 mission

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 India is ready to create a new record. Indian scientists launched Chandrayaan-3 from Sriharikota at 2.30 pm. Not only India, the eyes of the whole world are focused on this mission. Under the Chandrayaan-3 mission, its robotic equipment can land on that part of the moon (Shackleton Crater) by August 24, where no mission of any country has reached so far. For this reason, the eyes of the whole world are on this mission of India.

 Chandrayaan-3 was launched from LVM3 rocket. In order to successfully land the lander on the lunar surface, many types of safety equipment have been installed in it. The theme of Chandrayaan-3 mission is Science Of The Moon.

 Let us know the complete journey of Chandrayaan-3 from Earth to Moon.

 How Chandrayaan-3 will cover a distance of 3.84 lakh kilometers and what will be its specialty?

 Chandrayaan will move at a speed of 36 thousand 968 kilometers per hour

 Chandrayaan-3 was launched through LVM3 rocket at 2.35 pm. Then its initial speed was 1,627 km per hour. Its liquid engine started 108 seconds after launch at an altitude of 45 km and the rocket’s speed increased to 6,437 km per hour. On reaching an altitude of 62 km in the sky, both the boosters separated from the rocket and the speed of the rocket reached seven thousand km per hour.

 At an altitude of about 92 km, the heat shield protecting Chandrayaan-3 from the atmosphere separated. At a distance of 115 km, its liquid engine also separated and the cryogenic engine started working. Then the speed was 16 thousand km / h. The cryogenic engine took it to a distance of 179 km and its speed was 36968 km/h.

 The journey will be completed in 40 days

 The distance of the moon from the earth is about 3.84 lakh kilometers. Chandrayaan-3 will cover this distance in 40 to 50 days. Meaning if everything goes right then in 50 days the lander of Chandrayaan-3 will be on the surface of the moon. According to ISRO’s plan, it will be made a soft landing of Vikram Lander on the south pole of the Moon on August 23-24. If the lander soft lands on the South Pole, India will become the first country in the world to reach the South Pole.

Seeing the position of sunrise can also change

 Chandrayaan-3’s moon landing is scheduled for August 23-24, but it may change depending on the position of sunrise there.  If there is a delay in sunrise, ISRO can extend the landing time and do it in September.  ISRO chief S Somnath told that after launch, Chandrayaan-3 will go into Earth’s orbit and then slowly move towards the Moon.  We are hoping that all will be well and will land on August 23 or any day thereafter.

 How different is this from Chandrayaan-2?

 Compared to Chandrayaan-2, this time the lander of Chandrayaan-3 will land on a 40 times larger area with stronger wheels.  In order to successfully land the lander on the lunar surface, many types of safety equipment have been installed in it.  The theme of Chandrayaan-3 mission is Science Of The Moon.

 In Chandrayaan-2 where there were Orbiter, Lander and Rover.  At the same time, Chandrayaan-3 will have propulsion module, lander and rover.  The Lander + Rover of Chandrayaan-3 weighs about 250 kg more than the Lander + Rover of Chandrayaan-2.  While Chandrayaan-2 had a mission life of seven years (estimated), Chandrayaan-3’s propulsion module is designed to work for three to six months.  Chandrayaan-3 will move towards the moon faster than Chandrayaan-2.  Four thrusters have been installed in the lander of Chandrayaan-3.

 Lander-rover was named Vikram and Pragyan only

 The name of the lander of Chandrayaan-3 will be ‘Vikram’ and the name of the rover will be ‘Pragyan’.  The lander is present inside the rover itself.  The target of Chandrayaan-3 mission with a cost of Rs 615 crore is also similar to that of Chandrayaan-2.  Through this, maximum information has to be gathered about the surface of the moon.  Especially gathering information about the coldest region of the moon.  Four types of scientific payloads are going on the lander of Chandrayaan-3.  These will try to measure earthquakes on the moon, thermal properties of the surface, changes in plasma near the surface and the exact distance between the moon and the Earth.  The chemical and mineralogical composition of the lunar surface will also be studied.

the challenges are no less

 There are many challenges before Chandrayaan-3.  The biggest challenge is to land on an unknown surface.  It is an autonomous process for which no command is given.  The on-board computer decides how the landing will take place.  According to its sensors, the computer takes a decision by estimating the location, height, velocity, etc.  For the soft-landing of Chandrayaan-3 to be accurate and correct, it is necessary for many types of sensors to work together properly.

 The success of Chandrayaan-3 mission will be one of the biggest achievements of India’s space programmed.  India will become the fourth country after the US, Russia and China to have soft-landed on the moon.  In recent years, ISRO has established itself as the leading space agency of the world.  A successful mission to the moon would further strengthen its credibility.

ISRO CHANDRAYAAN 3 LAUNCH LIVE Chandrayaan- 3

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ISRO CHANDRAYAAN 3 LAUNCH LIVE Chandrayaan- 3’s preamble continues, will be launched after a while; PM Modi made this appeal
Chandrayaan- 3 will be launched at2.35 twinkles
By Achyut Kumar Published Date Fri, Jul 14/2023 02:35 AM(( IST)) streamlined Date Fri, Jul 14/2023 2:35 PM(( IST))
ISRO Chandrayaan- 3 launch live Chandrayaan- 3 preamble continues, will be launched after a while
stressed
Chandrayaan- 3 will be launched moment at 2.35 pm
PM Modi wishes ISRO before ISRO Chandrayaan- 3 launch
PM Modi said on Moon Mission 2023 – The day of July 14, 2023 will be written in golden letters in the Indian space sector

Chandrayaan- 3 launch live news Chandrayaan- 3 will be launched moment i.e. on 14th July. India’s eyes are fixed on creating history. Chandrayaan- 3 will be flagged off from the Satish Dhawan Space Center in Sriharikota at2.35 pm moment. Before launching, PM Modi complimented ISRO and thanked the scientists engaged in the charge.
ISRO Chandrayaan- 3 Launch Live Updates The moment which all Indians were eagerly staying for has eventually arrived. To fulfill the unfulfilled dream, Chandrayaan- 3 will fly moment. This will be a major moment. Chandrayaan- 3 will be launched from the Satish Dhawan Space Center in Sriharikota at 235 pm. The eyes of the world are fixed on this charge.
Chandrayaan- 3 is being described as the follow- up charge of Chandrayaan- 2. Its purpose is also to make a soft wharf of the lander on the south pole of the Moon. Vikram Lander crash wharf in Chandrayaan- 2. Three months latterly, the US space agency NASA set up its debris. After four times, ISRO will again try to land the lander and rover on the South Pole through Chandrayaan- 3. The six- wheeled robotic rover will remain inside the lander and will come out after wharf.

मेटा थ्रेड्स ऐप: ट्विटर के प्रभुत्व के लिए एक बड़ा ख़तरा .

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ट्विटर के प्रतिस्पर्धी के रूप में सोशल मीडिया ऐप थ्रेड्स का लॉन्च एक गेम- चेंजर है । मेटा, जो फेसबुक और इंस्टाग्राम का भी मालिक है, ने तय समय से पहले कल नया प्लेटफॉर्म लॉन्च किया । थ्रेड्स का लगभग तुरंत ही स्वागत किया गया- विशेष रूप से ट्विटर उपयोगकर्ताओं की भीड़ द्वारा, जिन्होंने अपने प्रिय प्लेटफ़ॉर्म को एलोन मस्क के हाथों ढहते हुए निराशा से देखा है । 24 घंटे से भी कम समय में, थ्रेड्स ने लगभग 30 मिलियन उपयोगकर्ताओं को आकर्षित किया ।

और मेटा के पास पहले से ही दो अरब से अधिक इंस्टाग्राम उपयोगकर्ता हैं जो सीधे अपने खातों को इससे लिंक कर सकते हैं, थ्रेड्स का उपयोगकर्ता आधार तेजी से बढ़ेगा ।

मार्क जुकरबर्ग ने अपने 30 मिलियन नए उपयोगकर्ताओं का जश्न मनाने के लिए थ्रेड्स पर पोस्ट किया । थ्रेड्स इसके सरल काले और सफेद फ़ीड और सुविधाओं के साथ जो आपको अन्य लोगों के” थ्रेड्स” पर उत्तर देने, प्यार करने, उद्धरण देने और टिप्पणी करने की सुविधा देते हैं, थ्रेड्स और ट्विटर के बीच समानताएं स्पष्ट हैं ।

अब सवाल यह है कि क्या थ्रेड्स ही अंततः ट्विटर को सत्ता से बाहर कर देगा? हम पहले भी यहां आ चुके हैं पिछले साल अक्टूबर में एलन मस्क के सीईओ बनते ही ट्विटर यूजर्स असहाय होकर देखते रहे । मैस्टोडॉन पहली” पलायन योजना” थी ।

लेकिन कई लोगों को इसके विकेन्द्रीकृत सर्वर का उपयोग करना कठिन और भ्रमित करने वाला लगा, प्रत्येक सर्वर के सामग्री नियम और समुदाय बहुत अलग थे । ट्विटर क्रैश होने की स्थिति में कई ट्विटर प्रशंसकों ने” बैक अप” मास्टोडॉन अकाउंट बनाए और यह देखने के लिए इंतजार किया कि मस्क आगे क्या करेंगे ।

इंतज़ार लंबा नहीं था. प्लेटफ़ॉर्म अस्थिरता और आउटेज आम हो गए क्योंकि मस्क ने ट्विटर कर्मचारियों को निकालना शुरू कर दिया( उन्होंने अब ट्विटर के मूल कार्यबल के लगभग 80 को निकाल दिया है) । कुछ ही समय बाद, मस्क ने उपयोगकर्ताओं को भयभीत कर दिया और ट्विटर की सत्यापन प्रणाली को बढ़ाकर और” ब्लू टिक” धारकों को प्रमाणीकरण के विशेषाधिकार के लिए भुगतान करने के लिए मजबूर करके सुर्खियां बटोरीं ।

इसने खाता प्रतिरूपण और बड़े पैमाने पर गलत सूचना साझा करने का द्वार खोल दिया । कुछ बड़े कॉर्पोरेट ब्रांड अपने विज्ञापन डॉलर को अपने साथ लेकर मंच छोड़ गए ।

मस्क ने बीबीसी जैसे विश्वसनीय समाचार संगठनों को भी” राज्य के स्वामित्व वाला” मीडिया करार दिया, जब तक कि सार्वजनिक प्रतिक्रिया ने उन्हें पीछे हटने के लिए मजबूर नहीं किया । हाल ही में, उन्होंने यह सीमित करना शुरू कर दिया कि उपयोगकर्ता कितने ट्वीट देख सकते हैं और घोषणा की कि ट्वीटडेक( ट्वीट शेड्यूल करने के लिए एक प्रबंधन उपकरण) भुगतान किए गए खातों तक सीमित होगा ।

ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने स्पाउटिबल और पोस्ट सहित कई विकल्प आज़माए हैं । ब्लूस्की, जो ट्विटर के सह- संस्थापक जैक डोर्सी से आया है, लोकप्रियता हासिल कर रहा है- लेकिन इसकी वृद्धि केवल आमंत्रण पंजीकरण प्रक्रिया के कारण सीमित हो गई है । अभी तक ट्विटर फॉलोअर्स का ध्यान किसी भी चीज़ ने नहीं खींचा था ।

थ्रेड्स में कई लोकप्रिय हस्तियां शामिल हो गई हैं, जिनमें प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस, ओपरा विन्फ्रे, दलाई लामा, शकीरा, गॉर्डन रामसे और एलेन डीजेनरेस शामिल हैं । थ्रेड्स समुदाय सफलता की कुंजी है मस्क के शासनकाल से पहले, ट्विटर ने कई वर्षों तक सफलता का आनंद लिया । यह लंबे समय से पत्रकारों, सरकारों, शिक्षाविदों और जनता के लिए दिन के प्रमुख मुद्दों पर जानकारी साझा करने का घर रहा है ।

आपात स्थिति में, ट्विटर ने वास्तविक समय में सहायता की पेशकश की । कुछ सबसे खराब आपदाओं के दौरान, उपयोगकर्ताओं ने जानकारी साझा की है और जीवन- रक्षक निर्णय लिए हैं । हालांकि खामियों के बिना नहीं- जैसे कि ट्रोल, बॉट और ऑनलाइन दुरुपयोग- ट्विटर की सत्यापन प्रक्रिया और अनुचित सामग्री को ब्लॉक करने और रिपोर्ट करने की क्षमता एक संपन्न समुदाय के निर्माण में इसकी सफलता के लिए केंद्रीय थी ।

यही बात थ्रेड्स को प्रतिस्पर्धियों से अलग करती है । थ्रेड्स को इंस्टाग्राम से जोड़कर, मेटा ने खुद को एक अग्रणी मंच के रूप में स्थापित करने के लिए आवश्यक उपयोगकर्ताओं के महत्वपूर्ण समूह तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत दी है( एक विशेषाधिकार जो मास्टोडॉन को प्राप्त नहीं था) । थ्रेड्स उपयोगकर्ता न केवल अपना उपयोगकर्ता नाम बरकरार रख सकते हैं, बल्कि वे अपने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स को भी अपने साथ ला सकते हैं । ट्विटर के समान अनुभव प्रदान करने वाले ऐप में समुदाय को बनाए रखने की क्षमता ही थ्रेड्स को अब तक का सबसे बड़ा खतरा बनाती है ।

मेरे शोध से पता चलता है कि जब लोग ऑनलाइन जानकारी से जुड़ते हैं तो उन्हें अधिकार, प्रामाणिकता और समुदाय की सबसे अधिक चाहत होती है । हमारी नई पुस्तक में, मेरे सह- लेखक डोनाल्ड ओ. केस, रिबका विल्सन और मैं बताते हैं कि कैसे उपयोगकर्ता उन स्रोतों से जानकारी खोजते हैं जिन्हें वे जानते हैं और उन पर भरोसा करते हैं ।

ट्विटर प्रशंसक समान कार्यक्षमता वाला एक वैकल्पिक मंच चाहते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे जल्दी से” अपने लोगों” को ढूंढना चाहते हैं । वे नहीं चाहते कि उन्हें अपने समुदायों का पुनर्निर्माण करना पड़े । संभवतः यही कारण है कि इतने सारे लोग ट्विटर पर बने हुए हैं, जबकि मस्क ने इसे जमीन पर उतारने के लिए बहुत अच्छा काम किया है । आगे की चुनौतियां बेशक, ट्विटर यूजर्स भी फ्राइंग पैन से आग में कूदने को लेकर चिंतित हो सकते हैं ।

किसी अन्य मेटा ऐप पर साइन अप करना अपनी चिंताओं के साथ आता है । नए थ्रेड्स उपयोगकर्ता जो बारीक प्रिंट पढ़ते हैं, वे ध्यान देंगे कि उनकी जानकारी का उपयोग दोनों प्लेटफार्मों पर” विज्ञापनों और अन्य अनुभवों को वैयक्तिकृत” करने के लिए किया जाएगा । और उपयोगकर्ताओं ने बताया है कि आप अपना थ्रेड्स खाता केवल तभी हटा सकते हैं जब आप अपना इंस्टाग्राम खाता हटाते हैं । इस प्रकार की घुसपैठ कुछ लोगों के लिए निराशाजनक हो सकती है ।

उदाहरण के लिए, अधिनियम निर्धारित करता है कि व्यवसाय “प्रभावी सहमति दिए बिना, लक्षित विज्ञापन के उद्देश्य से [उनके] मुख्य प्लेटफ़ॉर्म सेवा के बाहर अंतिम उपयोगकर्ताओं को ट्रैक नहीं कर सकते”। यह थ्रेड्स की गोपनीयता नीति के विरोध में हो सकता है।

मेटा ने अंततः थ्रेड्स को विकेंद्रीकृत बुनियादी ढांचे की ओर ले जाने की योजना की भी घोषणा की है। ऐप के “थ्रेड्स कैसे काम करता है” विवरण में, यह कहा गया है कि “थ्रेड्स के भविष्य के संस्करण फ़ेडिवर्स के साथ काम करेंगे”, जिससे “लोग मास्टोडन सहित विभिन्न प्लेटफार्मों पर एक-दूसरे का अनुसरण करने और बातचीत करने में सक्षम होंगे”।

इसका मतलब यह है कि लोग थ्रेड्स में साइन अप किए बिना, गैर-मेटा खातों से थ्रेड्स सामग्री को देख और उसके साथ इंटरैक्ट कर सकेंगे। एक्टिविटीपब मानक (जो प्लेटफार्मों के बीच विकेन्द्रीकृत अंतरसंचालनीयता को सक्षम बनाता है) का उपयोग करते हुए, थ्रेड्स वर्डप्रेस, मास्टोडन और ईमेल सर्वर के समान कार्य कर सकते हैं – जिसमें एक सर्वर के उपयोगकर्ता दूसरों के साथ बातचीत कर सकते हैं।

थ्रेड्स विकेंद्रीकृत सहभागिता के लिए इस योजना को कब और कैसे प्राप्त करता है – और यह उपयोगकर्ताओं के अनुभव को कैसे प्रभावित कर सकता है – यह स्पष्ट नहीं है।

क्या मेटा ने ‘व्यापार रहस्य’ चुराए?
जहाँ तक मस्क की बात है, वह बिना लड़े हार नहीं मानेगा। थ्रेड्स की रिलीज़ के कुछ ही घंटों बाद, ट्विटर के वकील एलेक्स स्पिरो ने एक पत्र जारी किया जिसमें मेटा पर व्यापार रहस्यों के “व्यवस्थित” और “गैरकानूनी दुरुपयोग” का आरोप लगाया गया।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि मेटा द्वारा नियुक्त किए गए पूर्व ट्विटर कर्मचारियों को “जानबूझकर” कुछ ही महीनों में मेटा के नकलची ‘थ्रेड्स’ ऐप को विकसित करने” का काम सौंपा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा ने इन दावों का खंडन किया है, लेकिन दोनों कंपनियों के बीच प्रतिद्वंद्विता अभी खत्म नहीं हुई है।

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